Opinion: गरीबों, पिछड़ों और जनजातीय लोगों के उत्थान के लिए कृतसंकल्प है मोदी सरकार

[ad_1]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में सबसे ज्यादा योजनाएं गरीबों, पिछड़ों और जनजातीय लोगों के लिए बनाई गई. इन कार्यक्रमों से जुड़े आंकड़े खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि योजनाएं कितनी सफल हुई हैं. तकरीबन आठ सालों में सरकार ने इस तरह की योजनाओं में 91 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. योजनाओं का लाभ जनजातीय समुदाय के लोगों को ठीक तरीके से मिल सके इसके लिए ट्राइबल रिसर्च सेंटर की स्थापना भी की गयी है.

पीएम मोदी मानते हैं कि सरकार कल्याणकारी योजनाओं के फायदों को आम आदमी तक पहुंचाती हैं, तो जनता के बीच सरकार के प्रति भरोसा बढ़ता है. इसी कड़ी में केन्द्रीय शिक्षा और कौशल विकास मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आदिवासी कल्याण और उत्थान के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में सिलसिलेवार तरीके से जानकारी दी. जानकारियों के साथ उन्होंने जो आंकड़े दिए वे अधिक महत्वपूर्ण हैं.

गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए सरकार के नजरिए को साफ करते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने बताया कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास, ये मोदी सरकार के लिए सिर्फ नारा ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है. मोदी सरकार बड़ी संजीदगी के साथ आदिवासी कल्याण के लिए काम में लगी है. जनजातीय लोगों के कल्याण के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी की सरकार ने केंद्रीय योजनाओं पर वित्त वर्ष 2014-15 से 2022-23 तक ₹91,000 करोड़ का आवंटन किया है. 2014-15 से पहले यह सिर्फ ₹19,437 करोड़ ही था. पीएम मोदी ने समाज के शोषित और वंचित वर्ग के लिए वित्तीय आवंटन खासा बढ़ाया है. भारत में अब तक राष्ट्रीय स्तर पर जनजातियों के लिए कोई रिसर्च सेंटर नहीं था. लेकिन पीएम मोदी की पहल पर ट्राइबल रिसर्च सेंटर की स्थापना की गयी है. आदवासियों की शिक्षा मोदी सरकार की प्राथमिकता है. खास बात ये है कि सिर्फ आदिवासियों की शिक्षा पर 8500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.

ध्यान रखने की बात है कि आदिवासी कल्याण की पहल भी वाजपेयी सरकार के दौरान शुरू हुई. 1999 में अटलजी ने पहली बार आदिवासी कल्याण मंत्रालय बनाया था. 2014 तक नरेन्द्र मोदी गुजरात के लंबे समय तक सीएम रहे. मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ में जब तक शासन था, तब तक आदिवासी कल्याण के लिए बीजेपी सरकारें काम करती रही हैं. धर्मेन्द्र प्रधान का कहना है कि आदिवासी कल्याण की योजनाओं को सीधा उन तक पहुंचाना, सीधा खाते में पैसा डालना, उनकी संस्कृति और आजीविका को बनाए रखने की कोशिशों का नतीजा है कि अब ये समाज भी पीएम मोदी पर भरोसा करने लगा है. इसका जीता जागता सबूत है गुजरात की ज्यादातर आदिवासी विधानसभा सीटों पर बीजेपी की जीत.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पूरे भारत में 700 से ज्यादा जनजातियां रहतीं हैं. इनमें से 75 प्रीमिटिव ट्राइब्स हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक देश की आबादी का लगभग 8 फीसदी है, जो और एक अनुमान के मुताबिक अब करीब 13-14 करोड़ होगी. पीएम मोदी ने इन जनजातियों का देश की आजादी की लड़ाई में अतुलनीय योगदान के लिए हमेशा याद किया है. पीएम मोदी ने हर मौके पर कहा है कि इन्हीं नायकों के चलते आजादी की राह आसान हुई. झारखंड के आदिवासियों के भगवान माने जाने वाले बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर देश में जनजातीय दिवस मनाया जाने लगा है.

Tags: BJP, Dharmendra Pradhan, Prime Minister Narendra Modi

[ad_2]

Source link