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भारत में इन 5 कारणों से नहीं बनेंगे चीन जैसे हालात, जानें क्या हैं ये


नई दिल्ली. चीन और दुनिया के कई हिस्सों में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत में खासतौर पर BF.7 वेरिएंट को देखते हुए कोरोना से लड़ाई के लिए सावधानी बरती जाने लगी है. इसी वेरिएंट के चलते चीन में अचानक मामलों में उछाल आया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एक बार फिर से चीन और बढ़ते मामलों वाले देशों से आ रहे लोगों के लिए एयर सुविधा फॉर्म को अनिवार्य कर सकता है जिसमें कि सफर के 72 घंटे के भीतर किए गए आरटी-पीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट और वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिखाना जरूरी होता है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन की 1.4 बिलियन की आबादी के लिए आगे आने वाला समय मुश्किल हो सकता है. नई लहर को लेकर चीन का जीरो कोविड रवैया है, इसमें सभी संक्रमित लोगों को आईसोलेट करने का नियम है.

चीन में भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद 7 दिसंबर को पूरे देश को खोल दिया गया था और कोविड संबंधी सभी पाबंदिया हटा दी थीं. फिलहाल चीन में टेस्ट कम हो रहे हैं और गंभीर मामले बढ़ रहे हैं. एपी के मुताबिक अस्पतालों के आईसीयू मरीजों से भरे हुए हैं और एंबुलेंस की मांग लगातार बनी हुई है. हालांकि भारत में चीन जैसी स्थिति नहीं पैदा होगी. जानिए क्या हैं इसके कारण-

भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान
भारत में शुरू से ही टीकाकरण के सख्त नियम रहे हैं और इसे कड़ाई से लागू किया गया है. सरकार ने इस दिशा में देश के वैज्ञानिकों और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत और नियामक उपाय किए हैं. भारत में 1 अक्टूबर 2021 को ही पूरी आबादी में एक अरब वैक्सीन लगा दी गई थीं और 17 जुलाई 2022 को यह आंकड़ा 2 अरब तक पहुंच गया.

भारत की वैक्सीन चीन की तुलना में ज्यादा प्रभावी
चीन की आबादी को कोरोनावैक वैक्सीन लगाई गई है वहीं भारत में कोविशील्ड और कोवैक्सिन लगाई गई हैं. एक स्टडी के मुताबिक कोरोनावैक की तुलना में कोविशील्ड गंभीर संक्रमण में ज्यादा फायदा करती है, खासतौर पर बुजुर्गों को.

चीन की वैक्सीन घरेलू स्तर पर बनी हैं और इसमें पुरानी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.

भारत की बड़ी आबादी हो चुकी है संक्रमित
चीन में अब तक कोविड के 20 लाख मामले ही सामने आए हैं जबकि भारत में अब तक 4.5 करोड़ लोग 2020 से अब तक वायरस की चपेट में आ चुके हैं. संक्रमण के कई पड़ावों के चलते भारत में पहले ही कोविड-19 के अलग-अलग वेरिएंट्स के चलते कई लहरें आ चुकी हैं.

भारत देख चुका है ओमिक्रॉन का BF.7 वेरिएंट
चीन में कोविड मामलों में बढ़ोतरी का कारण बना BF.7 वेरिएंट भारत में जुलाई से ही है. भारत में 2021 में कोविड की सबसे खराब लहर आई थी जिसमें लोगों को ऑक्सीजन और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझते हुए देखा गया था. बाद में भारत में ओमिक्रॉन की लहर आई जो पहले के मुकाबले हल्की थी.

बूस्टर डोज
भारत में 10 जनवरी से बूस्टर डोज लगाया जा रहा है. 10 अप्रैल को इसे 18 की आयु से ऊपर वाले सभी लोगों को देना शुरू कर दिया गया था.

चीन में, लगभग 60 प्रतिशत लोगों को बूस्टर टीका दिया गया है, हालांकि वृद्ध लोगों को विशेष रूप से बूस्टर वैक्सीन नहीं दिए जाने की संभावना है. चीन की आधिकारिक शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, 80 वर्ष से अधिक उम्र के 90 लाख से अधिक लोगों ने तीसरा टीका नहीं लगवाया है.

Tags: Coronavirus, COVID 19



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